कंफ्यूशियसी समाज सुधारक या धर्मिक नेता
कन्फ्यूशियस का दर्शन शास्त्र आज भी चीनी शिक्षा के लिए पथ प्रदर्शक बना हुआ है।
कन्फ्यूशियस ने कभी ईश्वर के बारे में कोई उपदेश नहीं दिए, फिर भी बाद में लोग उन्हें धार्मिक नेता मानने लगे।
दरअसल कन्फ्यूशियस एक धार्मिक नेता नहीं, बल्कि समाज सुधारक थे।
कनफ़ूशस् ने कभी भी अपने विचारों को लिखित रूप देना आवश्यक नहीं समझा।
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उसका कथन था कि बुद्धिमत्ता की बात यही है कि प्रत्येक व्यक्ति पूर्ण उत्तरदयित्व और ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करे और देवी देवताओं का आदर करते हुए भी उनसे अलग रहे। उसका मत था कि जो मनुष्य मानव की सेवा नहीं कर सकता वह देवी देवताओं की सेवा क्या करेगा। उसे अपने और दूसरों के सभी कर्तव्यों का पूर्ण ध्यान था, इसीलिए उसने कहा था कि बुरा आदमी कभी भी शासन करने के योग्य नहीं हो सकता, भले ही वह कितना भी शक्तिसंपन्न हो। नियमों का उल्लंघन करनेवालों को तो शासक दंड देता ही है, परंतु उसे कभी यह नहीं भूलना चाहिए कि उसके सदाचरण के आदर्श प्रस्तुत करने की शक्ति से बढ़कर अन्य कोई शक्ति नहीं है।
उनके दार्शनिक, सामाजिक तथा राजनीतिक विचारों पर आधारित मत को कनफ़ूशीवाद या कुंगफुत्सीवाद कहा जाता है।
आइए अब हम आपको बताते हैं कन्फ्यूशियस के वो चमत्कारिक बातें, जिनसे सीख लेने और अमल में लाने पर आपकी जिंदगी बदल जाएगी:
1. जीतने की इच्छाशक्ति, सफलता की लगन, किसी काम को अपनी पूरी क्षमता से करने की ज़िद...ये वो चाबियां हैं, जो आपके लिए दुनिया में सबसे ऊंचा मुकाम हासिल करने के दरवाज़े खोल देंगी।
2. जिस बात को हम सिर्फ सुनते हैं, उसे जल्द भूल जाते हैं, जो देखते हैं, उसे हम याद रखते हैं, लेकिन जिसे हम खुद करते हैं, उसे हमेशा के लिए समझ जाते हैं।
3. एक ग़लती करने के बाद, जो आदमी उसे सुधारता नहीं है, वह असल में दूसरी ग़लती कर रहा होता है।
4. सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम उसके लिए कितनी तैयारी करते हैं। अगर किसी काम से पहले हम उसकी तैयारी नहीं करते हैं, तो उस काम में हमारा फेल होना निश्चित है।
5. कभी न गिरने में कोई महानता नहीं होती, बल्कि गिरने पर हर बार उठ जाने में महानता होती है।
6. दूसरों से नफरत करना बहुत आसान है, लेकिन उनसे प्रेम करना बेहद मुश्किल। अच्छी चीज़ों को पाना हमेशा मुश्किल होता है, जबकि बुरी चीज़ें बहुत आसानी से मिल जाती हैं।
7. हम तीन तरीकों से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। पहला तरीका है, चिंतन करके औऱ यही ज्ञान पाने का सबसे सही तरीका भी है। दूसरा तरीका है, दूसरों का अनुकरण करके, जो कि सबसे आसान तरीका है। तीसरा तरीका है अपने अनुभव से और यह तरीका सबसे ज़्यादा कष्टकारी भी होता है।
8. अगर आप की गति धीमी है, तो भी आप अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं, बस ज़रूरी बात यह है कि आप रुके नहीं।
9. सफल और श्रेष्ठ आदमी वह होता है, जो बोलता कम और काम ज़्यादा करता है।
10. अपने रोज़गार के लिए उस काम को चुनो, जिसे करना आपको बेहद पसंद है। उसके बाद सारी जिंदगी मजबूरी में आपको कोई काम नहीं करना पड़ेगा।
11, बुराई को देखना और सुनना ही बुराई की शुरुआत होती है।
12. जिस काम को आप खुद ही पसंद नहीं करते, उसे दूसरों पर भी कभी मत थोपिए।

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