शनिवार, 1 अगस्त 2020

कंफ्यूशियसी समाज सुधारक या धर्मिक नेता

कंफ्यूशियसी  समाज सुधारक या धर्मिक नेता

कंफ्यूशियसी दर्शन की शुरुवात 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व चीन में हुई । जिस समय भारत में भगवान महावीर और गौतम बुध्द धर्म के संबंध में नये विचार रख रहे थे, चीन में भी एक महात्मा का जन्म हुआ , जिसका नाम कंफ्यूशियसी था। उस समय झोऊ राजवंश की शक्ति शिथिल पड़ जाने के कारण  चीन में बहुत से राज्य कायम हो गये , जो सदा आपस मे लड़ते थे। जिसे झगड़ते राज्यो का काल कहा जाने लगा । अतः चीन की प्रजा बहुत ही कष्ट झेल रही थी । ऐसे समय में चीन वासियों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने के लिये महात्मा कंफ्यूशियसी का आविर्भव हुआ। कंफ्यूशियसी का दर्शन आज भी चीनी शिक्षा के लिये पथ प्रदर्शक बना है।  
 इनका जन्म  करीब 551 ई० पू०  चीन के शानदोंग प्रदेश में हुआ था।  बचपन में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई। उनके ज्ञान की आकांक्षा असीम थी। बहुत अधिक कष्ट करके उन्हें ज्ञान अर्जन करना पड़ा था।इनकी मृत्यु 480 . पू. में हो गई थी। 53 वर्ष की उम्र में लू राज्य में एक शहर के वे शासनकर्ता तथा बाद में वे मंत्री पद पर नियुक्त हुए। मंत्री होने के नाते इन्होंने दंड के बदले मनुष्य के चरित्र सुधार पर बल दिया। कन्फ्यूशियस ने अपने शिष्यों को सत्य, प्रेम और न्याय का संदेश दिया। वे सदाचार पर अधिक बल देते थे। वे लोगों को विनयी, परोपकारी, गुणी और चरित्रवान बनने की प्रेरणा देते थे. वे बड़ों एंव पूर्वजों को आदर-सम्मान करने के लिए कहते थे. वे कहते थे कि दूसरों के साथ वैसा वर्ताव करो जैसा तुम स्वंय अपने साथ नहीं करना चाहते हो।
कन्फ्यूशियस एक सुधारक थे, धर्म प्रचारक नहीं। उन्होने ईश्वर के बारे में कोई उपदेश नहीं दिया, परन्तु फिर भी 

बाद में लोग उन्हें धार्मिक गुरू मानने लगे। इनकी मृत्यु 480 . पू. में हो गई थी। 

कन्फ्यूशियस का दर्शन शास्त्र आज भी चीनी शिक्षा के लिए पथ प्रदर्शक बना हुआ है।

कन्फ्यूशियस ने कभी ईश्वर के बारे में कोई उपदेश नहीं दिए, फिर भी बाद में लोग उन्हें धार्मिक नेता मानने लगे।

दरअसल कन्फ्यूशियस एक धार्मिक नेता नहीं, बल्कि समाज सुधारक थे।

कनफ़ूशस् ने कभी भी अपने विचारों को लिखित रूप देना वश्यक नहीं समझा।

कनफ़ूशस् का कहना था कि किसी देश में अच्छा शासन और शांति तभी स्थापित हो सकती है जब शासक, मंत्री 

तथा जनता का प्रत्येक व्यक्ति अपने स्थान पर उचित कर्तव्यों का पालन करता रहे। शासक को सही अर्थो में 

शासक होना चाहिएमंत्री को सही अर्थो में मंत्री होना चाहिए।

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  उसका विश्वास था कि आदर्श व्यक्ति अपने सदाचरण से जो उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, आम जनता उनके सामने निश्चय ही झुक जाती हे। यदि किसी देश के शासक को इसका भली भाँति ज्ञान करा दिया जाए कि उसे शासन कार्य चलाने में क्या करना चाहिए और किस प्रकार करना चाहिए तो निश्चय ही वह अपना उदाहरण प्रस्तुत करके आम जनता के आचरण में सुधार कर सकता है और अपने राज्य को सुखी, समृद्ध एवं संपन्न बना सकता है। इसी विश्वास के बल पर कनफ़ुशस् ने घोषणा की थी कि यदि कोई शासक १२ महीने के लिए उसे अपना मुख्य परामर्शदाता बना ले तो वह बहुत कुछ करके दिखा सकता है और यदि उसे तीन वर्ष का समय दिया जाए तो वह अपने आदर्शो और आशाओं को मूर्त रूप प्रदान कर सकता है।

उसका कथन था कि बुद्धिमत्ता की बात यही है कि प्रत्येक व्यक्ति पूर्ण उत्तरदयित्व और ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करे और देवी देवताओं का आदर करते हुए भी उनसे अलग रहे। उसका मत था कि जो मनुष्य मानव की सेवा नहीं कर सकता वह देवी देवताओं की सेवा क्या करेगा। उसे अपने और दूसरों के सभी कर्तव्यों का पूर्ण ध्यान था, इसीलिए उसने कहा था कि बुरा आदमी कभी भी शासन करने के योग्य नहीं हो सकता, भले ही वह कितना भी शक्तिसंपन्न हो। नियमों का उल्लंघन करनेवालों को तो शासक दंड देता ही है, परंतु उसे कभी यह नहीं भूलना चाहिए कि उसके सदाचरण के आदर्श प्रस्तुत करने की शक्ति से बढ़कर अन्य कोई शक्ति नहीं है।

उनके दार्शनिक, सामाजिक तथा राजनीतिक विचारों पर आधारित मत को कनफ़ूशीवाद या कुंगफुत्सीवाद कहा जाता है।

आइए अब हम आपको बताते हैं कन्फ्यूशियस के वो चमत्कारिक बातें, जिनसे सीख लेने और अमल में लाने पर आपकी जिंदगी बदल जाएगी:

1. जीतने की इच्छाशक्ति, सफलता की लगन, किसी काम को अपनी पूरी क्षमता से करने की ज़िद...ये वो चाबियां हैं, जो आपके लिए दुनिया में सबसे ऊंचा मुकाम हासिल करने के दरवाज़े खोल देंगी।

2. जिस बात को हम सिर्फ सुनते हैं, उसे जल्द भूल जाते हैं, जो देखते हैं, उसे हम याद रखते हैं, लेकिन जिसे हम खुद करते हैं, उसे हमेशा के लिए समझ जाते हैं।

3. एक ग़लती करने के बाद, जो आदमी उसे सुधारता नहीं है, वह असल में दूसरी ग़लती कर रहा होता है।

4. सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम उसके लिए कितनी तैयारी करते हैं। अगर किसी काम से पहले हम उसकी तैयारी नहीं करते हैं, तो उस काम में हमारा फेल होना निश्चित है।

5. कभी गिरने में कोई महानता नहीं होती, बल्कि गिरने पर हर बार उठ जाने में महानता होती है।

6. दूसरों से नफरत करना बहुत आसान है, लेकिन उनसे प्रेम करना बेहद मुश्किल। अच्छी चीज़ों को पाना हमेशा मुश्किल होता है, जबकि बुरी चीज़ें बहुत आसानी से मिल जाती हैं।

7. हम तीन तरीकों से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। पहला तरीका है, चिंतन करके औऱ यही ज्ञान पाने का सबसे सही तरीका भी है। दूसरा तरीका है, दूसरों का अनुकरण करके, जो कि सबसे आसान तरीका है। तीसरा तरीका है अपने अनुभव से और यह तरीका सबसे ज़्यादा कष्टकारी भी होता है।

8. अगर आप की गति धीमी है, तो भी आप अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं, बस ज़रूरी बात यह है कि आप रुके नहीं।

9. सफल और श्रेष्ठ आदमी वह होता है, जो बोलता कम और काम ज़्यादा करता है।

10. अपने रोज़गार के लिए उस काम को चुनो, जिसे करना आपको बेहद पसंद है। उसके बाद सारी जिंदगी मजबूरी में आपको कोई काम नहीं करना पड़ेगा।

​11, बुराई को देखना और सुनना ही बुराई की शुरुआत होती है।

12. जिस काम को आप खुद ही पसंद नहीं करते, उसे दूसरों पर भी कभी मत थोपिए।

 




 

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